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अक्‍सर आपने देखा होगा कि सर्दीयों के मौसम में हर किसी के होंठ और हाथ फटने लग जाते हैं यह समस्‍या अधिकतर लोगों के साथ होती है तो आइये जानते हैं सर्दी में हमारे हाथ और होंठ क्‍यों फट जाते हैं - Why do our hands and lips crack in winter

सर्दी में हमारे हाथ और होंठ क्‍यों फट जाते हैं - Why do our hands and lips crack in winter

सर्दी में हमारे हाथ और होंठ क्‍यों फट जाते हैं - Why do our hands and lips crack in winter

हमारी त्‍वचा हमारे शरीर का सबसे संवेदशील और महत्‍वूपर्ण अवयव है वयस्‍क शरीर के सम्‍पर्ण भार का लगभग 7 प्रतिशत भार त्‍वचा का होता है हमारी त्‍वचा चोट, घातक जीवाणुओं के हमलों तथा वातावरण के हानिकारक प्रभावों से शरीर के आंतरिक हिस्‍सों की रक्षा करती है आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि पॉच पैसे के सिक्‍के के आकार जितनी त्‍वचा में 3 करोड कोशिकाऐं, 1 मीटर रक्‍त वाहिकाएं, और 80 स्‍वेद ग्रंथियांं होती हैंं हमारी बाहरी त्‍वचा टाइल जैसी मृत कोशिकाओं से बनी होती है उन्‍हें निरंतर नीचे मौजूद जीवित कोशिकाओं से  केरोटीन नामक प्रोटीन भी कहते हैं साथ ही हमारी वाहरी त्‍वचा में ऐसी ग्रथियां भी होती हैं जो मेलानिन पैदा करती हैंं मेलानिन सूरज की किरणों में मौजूद हानिकारक पराबैंगनी (अल्ट्रावाय्लट) से हमारी रक्षा करता है त्‍वचा की स‍तह में मौजूद सिबेशस ग्रंथियां सीबम नाम का एक तैलीय द्रव छोडती हैं जो नलिकाओं के साथ प्रवाहित होता हुआ बाहरी त्‍वचा पर आ जाता है इस स्‍त्राव के कारण हमारी त्‍वचा मुलायम और चिकनी बनी रहती है यह द्रव हमारी त्‍वचा को रूखी होने से बचाता है 
सर्दीयों के मौसम हवा रूखी होती है जब यह रूखी हवा शरीर को छूती है तब यह बहुत तेजी से पानी को सोख लेती है और बाहरी परत में पानी की कमी के कारण पपडी और दररें आने लगती है त्‍वचा में स्‍नायु कोशिकाओं भी होती हैं जो मस्तिष्‍क को गर्मी, सर्दी और दर्द का अहसास  करती हैं चंकि हमारे होठों में तेल ग्रंथियां होती हैं इसलिए सबसे पहले वही फटते हैं           



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